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सीरिया ने यमन में सैनिक भेजने से किया इनकार

यमनी अधिकारियों ने एएफपी से कहा कि 3,000 तक सीरियाई सैनिक यमन जा रहे हैं और कुछ वहां पहुंच भी चुके हैं; दमिश्क का कहना है कि "इस समय" कोई सेना नहीं भेजी गई है।

स्कर्दू टाइम्स डेस्क
सीरिया ने यमन में सैनिक भेजने से किया इनकार
तस्वीर: Bangkok Post

सीरिया की सरकार ने शनिवार को इस बात से इनकार किया कि उसने यमन में सैनिक भेजे हैं। इससे पहले यमनी अधिकारियों ने एएफपी समाचार एजेंसी से कहा था कि हजारों सीरियाई सैनिक यमन और सऊदी अरब भेजे जाने वाले हैं और कुछ तो पहले ही वहां पहुंच चुके हैं।

सीरिया की सरकारी समाचार एजेंसी साना ने एक कूटनीतिक सूत्र के हवाले से कहा कि दमिश्क ने "इस समय" यमन में सेना नहीं भेजी है। उसी सूत्र ने कहा कि इस हफ्ते रियाद के साथ जो समझौता हुआ है, वह "सैन्य बलों के प्रशिक्षण और उनकी क्षमताओं के निर्माण पर केंद्रित है" और अगले महीने सीरिया के तालमेल दौरे होंगे। सूत्र ने कहा कि यह सहयोग आगे चलकर आपसी रक्षा समझौते में या सीरिया के मक्का गठबंधन में शामिल होने में बदल सकता है।

इससे पहले यमन के तीन सैन्य सूत्रों और एक रक्षा अधिकारी ने एएफपी से कहा था कि सैकड़ों सीरियाई सैनिक सीमा के दोनों ओर पहले ही तैनात हो चुके हैं। यमन की सर्वोच्च शासी संस्था प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के एक सूत्र ने कहा कि हूतियों को रोकने में मदद के लिए 3,000 तक सीरियाई सैनिक भेजे जाएंगे। उसने कहा कि इस व्यवस्था को इस हफ्ते रियाद की सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की यात्रा के दौरान मंजूरी दी गई।

यमन के रक्षा मंत्रालय के एक उच्च स्तरीय सूत्र ने पहले चरण में करीब 3,000 सैनिकों का अनुमान लगाया, जिनमें से कुछ पहले ही तैनात हैं, और कहा कि कुल संख्या 10,000 तक पहुंच सकती है। एक सैन्य अधिकारी ने एएफपी से कहा कि सीमा के यमनी हिस्से में पहले से मौजूद सीरियाई सैनिक उस इलाके में हूतियों के खिलाफ ड्रोन अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के सूत्र के मुताबिक सीरिया और सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालयों की तकनीकी टीमें इंतजामों को अंतिम रूप देने के लिए रियाद में थीं।

सऊदी अरब अपने सहयोगियों पर मदद के लिए दबाव बना रहा है, क्योंकि ईरान समर्थित समूह हूतियों ने साम्राज्य पर हमले तेज कर दिए हैं। जानलेवा हमलों के कारण रियाद हवाई अड्डा दो हफ्ते बंद रहा और समूह ने हाल में सऊदी समर्थित यमनी सरकार से लाल सागर तट का कुछ हिस्सा छीन लिया है।

रियाद, अंकारा और इस्लामाबाद ने अगस्त में मक्का में एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाता है। सीरिया के शीर्ष राजनयिक ने पिछले हफ्ते कहा था कि दमिश्क इस पर विचार कर रहा है कि वह इसमें शामिल हो या नहीं। मिस्र की संसद ने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के उस अनुरोध को मंजूरी दे दी है, जिसमें कहा गया था कि अगर सऊदी अरब मांगे तो उसे रक्षात्मक सैन्य सहायता दी जा सकती है। फ्रांस सऊदी अरब के एक प्रमुख तेल टर्मिनल की सुरक्षा में मदद के लिए सैनिक भेज रहा है और ब्रिटेन ने अक्टूबर में कहा था कि वह लड़ाकू विमान तैनात करेगा।

यमन का युद्ध 2014 में शुरू हुआ था, जब हूतियों ने राजधानी पर कब्जा कर लिया था और एक साल बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन युद्ध में शामिल हुआ था। चार साल के संघर्ष विराम के टूटने के बाद इस गर्मी में देशभर में लड़ाई फिर शुरू हो गई।

ख़बरों में क्या अलग है

अहराम ऑनलाइन ने इनकार को सबसे ऊपर रखा और बताया कि सरकारी एजेंसी साना के हवाले से एक सीरियाई कूटनीतिक सूत्र ने कहा कि दमिश्क ने "इस समय" यमन में सैनिक नहीं भेजे हैं। अल-मॉनिटर की हेडलाइन में तैनाती की योजना ही थी, जिसका स्रोत एएफपी के जरिए यमनी अधिकारी थे और इनकार का कोई जिक्र नहीं था। बैंकॉक पोस्ट ने एएफपी की रिपोर्ट विस्तार से छापी, जिसमें प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के सूत्र का 3,000 का आंकड़ा और रक्षा मंत्रालय के सूत्र की बताई 10,000 की ऊपरी सीमा शामिल थी, और साना का इनकार खबर में नीचे था। किसी भी रिपोर्ट में जिन यमनी अधिकारियों या सीरियाई कूटनीतिक सूत्र का हवाला दिया गया, उनका नाम नहीं बताया गया।

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