ब्राजील ने जीवाश्म ईंधन छोड़ने का गैर-बाध्यकारी वैश्विक रोडमैप जारी किया
दो दस्तावेज़ों में ऐसे कदम बताए गए हैं जो कोई भी देश अभी उठा सकता है, लेकिन इनमें कोई समय-सीमा या मानक नहीं है, जिस पर आलोचना हो रही है कि ये ज़रूरी रफ़्तार से पीछे हैं।

ब्राजील ने मंगलवार को दो दस्तावेज़ जारी किए, जिन्हें वह कोयला, तेल और गैस से दूरी बनाने और वनों की कटाई रोकने के लिए दुनिया का पहला वैश्विक रोडमैप बताता है। सरकार ने कहा कि इनमें ऐसे कदम बताए गए हैं जो कोई भी देश अभी शुरू कर सकता है, नई तकनीक या आर्थिक बदलाव का इंतज़ार किए बिना।
ये रोडमैप बाध्यकारी नहीं हैं। इनमें कोई समय-सीमा या पड़ाव नहीं है, और यह हर देश पर छोड़ा गया है कि वह जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता का आकलन करे और तय करे कि कौन सी नीतियां लागू करनी हैं।
Cop30 की अध्यक्षता करने वाले ब्राज़ीली राजनयिक आंद्रे कोर्रेया दो लागो ने कहा कि इन दस्तावेज़ों का मक़सद संयुक्त राष्ट्र की सालाना जलवायु वार्ता को बातचीत से आगे अमल की ओर ले जाना है। उन्होंने गार्डियन से कहा, "बातचीत करने और अमल करने वाले लोग अलग-अलग समूह हैं।" उन्होंने कहा कि वित्त, परिवहन, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के मंत्रालयों को इन्हें अपनाना चाहिए।
ब्राजील ने पिछले नवंबर में अमेज़न के बेलेम में Cop30 की मेज़बानी की थी। अंतिम प्रस्तावों में जीवाश्म ईंधन का ज़िक्र होना चाहिए या नहीं, इस पर विवाद समझौते पर खत्म हुआ: अध्यक्षता दो रोडमैप तैयार करेगी, एक "ऊर्जा प्रणालियों में जीवाश्म ईंधन से न्यायसंगत, व्यवस्थित और समान तरीक़े से दूरी बनाने" पर और एक वनों की कटाई पर।
सुझाए गए कदमों में तेल और गैस निकालने की जगहों पर गैस के फ़्लेयरिंग और वेंटिंग को कम करना, जीवाश्म ईंधन के उत्पादन और इस्तेमाल पर सब्सिडी घटाना और नवीकरणीय बिजली उत्पादन बढ़ाना शामिल है। गार्डियन के मुताबिक़, मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड से 80 गुना ज़्यादा शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, इसलिए कुओं से निकलने वाली गैस पर लगाम का तुरंत असर होगा।
इंपीरियल कॉलेज लंदन में जलवायु विज्ञान और नीति के प्रोफ़ेसर योएरी रोजेल ने कहा कि रोडमैप "क़ीमती हैं, लेकिन बदलाव की ज़रूरी रफ़्तार साफ़ नहीं बताते", क्योंकि इनमें कोई समय-रेखा या अहम मानक नहीं है। उन्होंने कहा कि इनके बिना ये खुला छोड़ देते हैं कि गर्मी को 2C से काफ़ी नीचे और हो सके तो 1.5C तक सीमित रखने के पेरिस समझौते के लक्ष्य को पूरा करने के लिए क्या ज़रूरी है।
वनों की कटाई वाले रोडमैप में संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला है, जिनके मुताबिक़ 2030 तक जंगलों के लिए सालाना क़रीब 300 अरब डॉलर और 2050 तक सालाना 500 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी, जबकि अभी सालाना क़रीब 85 अरब डॉलर उपलब्ध हैं। यह Cop30 में बने ट्रॉपिकल फ़ॉरेस्ट्स फ़ॉरएवर फ़ैसिलिटी का ज़िक्र करता है, जिसमें ब्रिटेन ने 400 मिलियन पाउंड और दूसरे देशों ने मिलाकर क़रीब 7 अरब डॉलर दिए, और साफ़ की गई ज़मीन पर उगाए गए सामान के व्यापार पर कमज़ोर निगरानी का भी। यह नोट करता है कि कुछ मामलों में स्थानीय या राष्ट्रीय प्रशासन वनों की कटाई को मंज़ूरी देते दिखे हैं; इंडोनेशिया पर सिविल सोसायटी समूहों ने उन आगों को लेकर "घोर लापरवाही" का मुक़दमा किया है जिन्होंने जंगल साफ़ किए, सबसे ज़्यादा संभावना है पाम ऑयल के बागानों के लिए।
एक अलग पहल से ज़्यादा स्पष्ट योजनाएं सामने आई हैं। अप्रैल में कोलंबिया के सांता मार्ता में एक सम्मेलन में क़रीब 60 देशों ने संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रिया से बाहर एक गठबंधन बनाया, और जर्मनी, फ़्रांस और नीदरलैंड ने तब से जीवाश्म ईंधन छोड़ने की राष्ट्रीय योजनाएं जारी की हैं।
Cop31 इस महीने तुर्की के अंताल्या में शुरू होगा। ब्राजील ने रोडमैप राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के चौथा कार्यकाल जीतने के क़रीब एक हफ़्ते बाद जारी किए। गार्डियन ने बताया कि उनके पिछले चार सालों में वनों की कटाई की दर क़रीब 70% घटी। उनके हारे हुए प्रतिद्वंद्वी फ़्लावियो बोल्सोनारो से उम्मीद थी कि वे अपने पिता जायर बोल्सोनारो की नीतियों पर लौटेंगे।
ख़बरों में क्या अलग है
गार्डियन ने दोनों रोडमैप की सामग्री, इंपीरियल कॉलेज लंदन के योएरी रोजेल की आलोचना और Cop30 अध्यक्षता के अमल वाले तर्क को छापा, और अकेले वही था जिसने आंद्रे कोर्रेया दो लागो का इंटरव्यू किया। जापान टाइम्स ने जापान के जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहते हुए ट्रांज़िशन बॉन्ड जारी करते रहने पर अलग ख़बर छापी, जो कोण बाक़ियों ने नहीं उठाया। एशिया न्यूज़ नेटवर्क ने अपनी कवरेज जलवायु सम्मेलन से पहले की पारिस्थितिकी संकट के इर्द-गिर्द रखी, ब्राज़ीली दस्तावेज़ों के इर्द-गिर्द नहीं। DW की ख़बर बर्लिन में एक डिजिटल और एआई सम्मेलन के बारे में थी, और कार्लस्क्वेयर कॉर्पोरेट फ़ाइनेंस ने जर्मनी के निवेश माहौल पर FAZ के एक इंटरव्यू को छापा।

बोलीविया में अल नीनो आपातकाल, सूखे से 78,000 परिवार प्रभावित
राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़ का कहना है कि यह फरमान संसाधन जारी करेगा और बचाव दल भेजेगा, जबकि नौ में से छह विभाग सूखे की चपेट में हैं और 75,000 से अधिक मवेशी मारे गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र की दो रिपोर्टों में चेतावनी: 1.5C की सीमा पार होने से धरती की बर्फ को अपूरणीय नुकसान
अध्ययनों के अनुसार ग्लेशियर, समुद्री बर्फ और जमी हुई ज़मीन पर ऐसे प्रभाव पड़ेंगे जिन्हें पलटा नहीं जा सकता, और इनमें तापमान को पेरिस समझौते की सीमा के भीतर रखने के लिए कार्रवाई की मांग की गई है।

लाहौर की हवा खतरनाक, AQI 530 के पार, गुजरांवाला और खराब
IQAir ने सुबह 8 बजे लाहौर का PM2.5 343 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बताया, जबकि सैटेलाइट डेटा ने अक्टूबर में पंजाब भर में फसल जलाने के 13,241 स्थान गिने।

येरेवान प्रकृति सम्मेलन समझौते के साथ खत्म, फंडिंग अनसुलझी
लगभग 200 देशों ने शनिवार तड़के सीओपी17 के मुख्य दस्तावेज़ों को मंजूरी दी, लेकिन कैली फंड लगभग खाली है और वैज्ञानिक रिपोर्टों पर विवाद बना रहा।
लाहौर 420 के साथ वैश्विक वायु गुणवत्ता सूचकांक में शीर्ष पर, कराची तीसरे स्थान पर
पंजाब सरकार के मॉनिटरों ने सुबह 7 बजे गुजरांवाला को 500 और लाहौर को 478 पर दर्ज किया, जबकि लाहौर के नौ इलाकों में रीडिंग 500 तक पहुंची।

मुल्तान का वायु गुणवत्ता सूचकांक 434, पंजाब में लौटा स्मॉग
गुजरांवाला में 347 और लाहौर में 294 दर्ज हुआ, जबकि सर्दियों का स्मॉग शुरू होते ही पंजाब के चार अन्य शहर भी सूचकांक पर 200 से ऊपर रहे।

पाकिस्तान के पंजाब में फसल अवशेष जलाने के हॉटस्पॉट भारतीय पंजाब से 4.2 गुना: सैटेलाइट डेटा
ओकारा, गुजरांवाला और ननकाना साहिब अकेले भारतीय पंजाब के पूरे हिस्से से ज्यादा हॉटस्पॉट दर्ज कर चुके हैं, जबकि लाहौर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 232 तक पहुंच गया।